भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा – वंदे मातरम को लेकर कांग्रेसी रुख, विभाजनकारी राजनीति से प्रेरित
राष्ट्रगीत के इतिहास, अर्थ और गौरवशाली विरासत को लेकर जनजागरण चलाएगी भाजपा,
वंदे मातरम के सम्मान और गायन के संवैधानिक अधिकार पर समझौता नही करने देंगे
देहरादून। भाजपा ने वंदे मातरम को लेकर कांग्रेसी रुख को विभाजनकारी राजनीति से प्रेरित बताते हुए, कठोर शब्दों में निंदा की है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रगीत के इतिहास, अर्थ और गौरवशाली विरासत को जन जन तक पहुँचाने के लिए पार्टी जनजागरण अभियान चलाने जा रही है। वहीं पूर्व सीएम हरदा की चिंता पर सुझाव दिया कि वे वरिष्ठ हैं, अपने कार्यकर्ताओं को वन्देमातरम के सम्मान के लिए प्रेरित करें। साथ ही कहा, जो फिलहाल पूर्ण राष्ट्रगीत गा नहीं सकते, वे कम से कम कानून सम्मत सम्मान तो दे ही सकते हैं
पार्टी मुख्यालय में हुई पत्रकार वार्ता में उन्होंने दिल्ली में सम्पन्न भाजपा राष्ट्रीय कार्यसमिति के पहले राजनैतिक प्रस्ताव की जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सम्मान और उसके गायन के संवैधानिक अधिकार को लेकर, पार्टी किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करने वाली है। साथ ही हाल में कांग्रेस पार्टी की कार्यसमिति द्वारा 1937 के अपने विभाजनकारी प्रस्ताव को दोबारा स्वीकार करने और वंदे मातरम के केवल दो छंद गाने के निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा की है। पार्टी वंदेमातरम को अधूरा और विस्मृत करने के विपक्षी प्रयासों को असफल करने और राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान, स्वाभिमान और ऐतिहासिक महत्व को जन जन, विशेषकर युवाओं के बीच पहुंचने के उद्देश्य से जागरुकता अभियान चलाने जा रही है।
इस दौरान उन्होंने पार्टी के प्रस्ताव के कुछ मूल बिंदुओं की चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा, ‘वंदे मातरम’ पर कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के विभाजनकारी प्रस्ताव को पुनः स्वीकार करने के फैसले का कड़े शब्दों में विरोध करती है। भाजपा के लिए राष्ट्रीय स्वाभिमान, देशभक्ति और देश की अखंडता से बढ़कर कुछ भी नहीं है। यही वजह है कि पार्टी ने अपनी पहली राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण गायन के साथ संपन्न किया और गौरवशाली भारत की रक्षा के संकल्प को दोहराया है। भाजपा ‘वंदे मातरम’ को केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति श्रद्धा, स्वतंत्रता संग्राम का मूल मंत्र और राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक मानती है। ‘वंदे मातरम’ क्रांतिकारियों के बलिदान का प्रतीक है, जिसकी गरिमा की रक्षा के लिए भाजपा पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, मोदी सरकार ने देश के सम्मान, देशभक्ति के गान और देशवासियों के स्वाभिमान के प्रतीक ‘वंदे मातरम’ पर ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। वर्ष 2025 में संसद की ऐतिहासिक चर्चा से ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर इसके पूर्ण स्वरूप का आधिकारिक सम्मान स्थापित किया गया है। क्योंकि राष्ट्रगीत को कड़ा कानूनी संरक्षण दिया जाना जरूरी था। जिसके लिए ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित कर ‘वंदे मातरम’ के गायन में जानबूझकर व्यवधान डालने को दंडनीय अपराध बनाया गया।
लाल किले की प्राचीर से 15 अगस्त पर पहली बार ‘वंदे मातरम’ गायन बड़े हर्षोल्लास के साथ हुआ, जिससे राष्ट्रगीत को उसका खोया हुआ सर्वोच्च सम्मान मिला और देशवासियों को ‘वंदे मातरम’ का स्वाभिमान मिला।
पार्टी की राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक में 22 अगस्त को पहले ही निर्णय में ‘वंदे मातरम’ के सम्मान की रक्षा का संकल्प लिया गया है और आगामी कार्ययोजना तैयार की गई है। भाजपा के लिए यह विषय वोट बैंक की राजनीति से परे है। पार्टी का मानना है कि राष्ट्रगीत किसी दल की संपत्ति नहीं है और इसका सम्मान चुनावी गणित या वोट बैंक की सौदेबाजी से ऊपर है।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान, सह प्रभारी राजेंद्र नेगी, प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी, हनी पाठक भी उपस्थित रही।

