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प्रधानमंत्री मोदी के सामने नीति आयोग की शासी परिषद की 10वीं बैठक में  सीएम पुष्कर धामी ने शानदार तरीके से कई बिंदुओं पर रखा प्रेजेंटेशन, राजजात यात्रा- 2026 व कुंभ – 2027 के लिए मांगा सहयोग

कहा -शहरी क्षेत्रों में टिकाऊ ड्रेनेज प्रणाली विकसित करने की बेहद जरुरत
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर ड्रेनेज की विशेष योजना बनाने का किया अनुरोध,
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई नीति आयोग की बैठक,
“पीएम कृषि सिंचाई योजना“ में लिफ्ट इरिगेशन शामिल करने का किया अनुरोध
नई दिल्ली / देहरादून।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की शासी परिषद की शनिवार को हुई दसवीं बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि राज्य में तेजी से हो रहे शहरीकरण के चलते शहरों में ड्रेनेज की समस्या एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने अनुरोध किया कि इस समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर टिकाऊ ड्रेनेज प्रणाली विकसित करने के लिए विशेष योजना बनाई जाए।
मुख्यमंत्री ने “पीएम कृषि सिंचाई योजना“ की गाइडलाइन्स में लिफ्ट इरिगेशन को सम्मिलित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वर्तमान में पर्वतीय क्षेत्र का मात्र 10 प्रतिशत भूभाग ही सिंचित हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में हिमनद आधारित नदियों को वर्षा आधारित नदियों से जोडने की दिशा में “नदी जोड़ो परियोजना“ के साथ ही चेक डैम्स और लघु जलाशयों के निर्माण के माध्यम से वर्षा जल को संरक्षित करने के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे हैं।
राजजात यात्रा व कुंभ के लिए मांगा सहयोग
वर्ष 2026 में उत्तराखंड में पर्वतीय महाकुंभ के रूप में प्रसिद्ध “मां नन्दा राजजात यात्रा“ तथा वर्ष 2027 में हरिद्वार में “कुंभ“ का आयोजन होना है। मुख्यमंत्री धामी ने इन दोनों आयोजनों को “भव्य एवं दिव्य“ बनाने के लिए सहयोग मांगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में “डेमोग्राफिक डिविडेंड“ की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस दृष्टि से आने वाले दस वर्ष में हम “डेमोग्राफिक डिविडेंड“ का सर्वाधिक लाभ उठा सकते हैं।
जीडीपी में प्राथमिक सेक्टर का योगदान मात्र 9.3 प्रतिशत
मुख्यमंत्री धामी ने नीति आयोग की बैठक में कहा कि उत्तराखंड की जीडीपी में प्राथमिक सेक्टर का योगदान, जहां मात्र 9.3 प्रतिशत है, वहीं इस कार्य में लगभग 45 प्रतिशत आबादी लगी है। इस समस्या को देखते हुए हमने प्रदेश के काश्तकारों को “लो वैल्यू एग्रीकल्चर“ की बजाए “हाई वैल्यू एग्रीकल्चर“ अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ किया है, जिनमें एप्पल मिशन, कीवी मिशन, ड्रैगन फ्रूट मिशन, मिलेट मिशन तथा सगंध कृषि को प्रोत्साहन शामिल है।

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