भाजपा प्रदेश पर भक्त और विधायक विनोद चमोली ने किया कांग्रेस पर बड़ा हमला- कहा, सामने आ रहे घोटाले राजनैतिक भ्रष्टाचार का असली काला चेहरा
टाइमिंग पर सवाल वाले बताएं, पहले इस्तीफा क्यों नहीं और कौन हैं बाकी दोषी?
देहरादून । भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और धर्मपर क्षेत्र के विधायक विनोद चमोली ने कहा कि प्रदेश और देश में सामने आ रहे कांग्रेसी घोटाले कांग्रेस के राजनैतिक भ्रष्टाचार का असली चेहरा है। पूर्व सीएम हरदा के पीए के पास काले धन की बरामदगी और आरोपी पीए के कांग्रेसी चंदा मॉडल वाला बयान से साबित होता है, वहां करप्शन पार्टी की पूरी दाल ही काली है।
पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए चमोली ने सोमवार को भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने वाली कांग्रेस की पोल खोली । उन्होंने कांग्रेस सरकारो के ऐसे ही एक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि, अभी कर्नाटक के अंदर पाया गया कि कांग्रेस के एक मंत्री सतीश के, जो पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर हैं। उनके परिवार के पास अथाह संपत्ति ईडी ने जब्त की है और जब उसकी तह में जाया गया तो पता चला कि अफ्रीका तक उनका व्यापार फैला हुआ है। अफ्रीका में इसी भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खदान का उद्योग चल रहा है, जो उनके परिजनों के नाम से चल रहा है, उनकी कंपनियां उसमें चल रही हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसा एक घटनाक्रम हमारे उत्तराखंड में भी हुआ है। चंदन सिंह जीना, जो कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पीएस थे, उनके बहुत करीबी रहे हैं और आज तक उनके करीबी हैं, उनके यहां भी ईडी के छापे पड़े। छापों में जिस तरह से वहां पर चीजें मिली हैं गोल्ड मिला है, कैश मिला है, यहां तक कि विदेशी मुद्रा भी उनके यहां मिली है। और साथ में बहुत कीमती चीजें, जो कि हम लोग सोच भी नहीं पाते हैं, इतनी महंगी चीजें उनके पास मिली हैं। उन्होंने हैरानी जताई कि अब इतना बड़ा करप्शन उत्तराखंड में होता रहा और कांग्रेस मूकदर्शक बनकर देखती रही। ऐसे में आज जब उसका पर्दाफाश हुआ है, ईडी ने वहां छापे मारे हैं और ये सब चीजें निकली हैं, तो हरीश रावत कहते हैं कि मैं इस्तीफा देता हूं।
जबकि ये तो उनके समय की जांच है, नई बात नहीं है। आज तो ईडी ने छापा मारा है, तो वहां चीजें निकली हैं। लेकिन यह विषय उसी समय स्पष्ट हो गया था कि नियुक्तियों में भ्रष्टाचार हुआ है, परीक्षाओं में भ्रष्टाचार हुआ है। स्वयं उनके द्वारा जांच बिठाई गई, पहले लीपापोती की गई, फिर दोबारा जांच बैठी, जांच में दोषी पाए गए।
उन्होंने हरदा के इस्तीफे पर सवाल उठाए कि इस पूरे घटनाक्रम में वे मुख्यमंत्री थे, लेकिन उन्होंने तब इस्तीफे की पेशकश नहीं की। उसके बाद से आज लगभग 9 साल हो गए हैं। उनको मालूम था कि भ्रष्टाचार हुआ है, लेकिन कभी बाद में भी इस्तीफे की पेशकश नहीं की। अंन्ततः जब पकड़े जाते हैं, तो फिर फजीहत से बचने के लिए इस्तीफे की पेशकश करते हैं, सहानुभूति लेने का प्रयास करते हैं। कांग्रेस को यह बताने का प्रयास करते हैं कि ‘मैं तो कांग्रेस का बड़ा सच्चा सिपाही हूं, मेरे कारण कांग्रेस पर कोई चुनाव में उस पर दुष्प्रभाव न पड़े, तो मैं इस्तीफा देता हूं’ इस तरह की बातें करते हैं। लेकिन उन्हें जवाब देना चाहिए कि उनकी नैतिक जिम्मेदारी क्या थी? जब उनके मुख्यमंत्री रहते हुए यह घोटाला सामने आ गया था, तो वहीं पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। नहीं तो कम से कम अपने पद से उसी समय इस्तीफा तो दे सकते थे।
इसी तरह उन्होंने कटाक्ष किया कि चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में ईडी की कार्रवाई के बाद मीडिया में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। उसमें बरामदगी और पार्टी फंड के लिए रकम जुटाने के दावों ने कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आज मीडिया में चंदन सिंह जीना का बयान सामने आया है कि ED द्वारा बरामद रकम अलग-अलग लोगों की ओर से कांग्रेस के पार्टी फंड के लिए दिया गया चंदा था। अब कांग्रेस को बताना चाहिए कि यह कौन-सा “चंदा मॉडल” है, जिसमें पार्टी फंड के नाम पर ओएसडी के जरिए रकम जुटाई जाती है?
कांग्रेस के कार्रवाई की टाइमिंग के सवाल पर कहा कि क्या वे चाहते हैं चुनाव के कारण कोई कार्रवाई न हो, जबकि चुनाव तो इस देश में हर दूसरे साल कहीं न कहीं चुनाव होता है।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान, सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र सिंह नेगी, संपर्क प्रमुख हरीश चमोली भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
देहरादून । भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और धर्मपर क्षेत्र के विधायक विनोद चमोली ने कहा कि प्रदेश और देश में सामने आ रहे कांग्रेसी घोटाले कांग्रेस के राजनैतिक भ्रष्टाचार का असली चेहरा है। पूर्व सीएम हरदा के पीए के पास काले धन की बरामदगी और आरोपी पीए के कांग्रेसी चंदा मॉडल वाला बयान से साबित होता है, वहां करप्शन पार्टी की पूरी दाल ही काली है।
पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए चमोली ने सोमवार को भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने वाली कांग्रेस की पोल खोली । उन्होंने कांग्रेस सरकारो के ऐसे ही एक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि, अभी कर्नाटक के अंदर पाया गया कि कांग्रेस के एक मंत्री सतीश के, जो पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर हैं। उनके परिवार के पास अथाह संपत्ति ईडी ने जब्त की है और जब उसकी तह में जाया गया तो पता चला कि अफ्रीका तक उनका व्यापार फैला हुआ है। अफ्रीका में इसी भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खदान का उद्योग चल रहा है, जो उनके परिजनों के नाम से चल रहा है, उनकी कंपनियां उसमें चल रही हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसा एक घटनाक्रम हमारे उत्तराखंड में भी हुआ है। चंदन सिंह जीना, जो कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पीएस थे, उनके बहुत करीबी रहे हैं और आज तक उनके करीबी हैं, उनके यहां भी ईडी के छापे पड़े। छापों में जिस तरह से वहां पर चीजें मिली हैं गोल्ड मिला है, कैश मिला है, यहां तक कि विदेशी मुद्रा भी उनके यहां मिली है। और साथ में बहुत कीमती चीजें, जो कि हम लोग सोच भी नहीं पाते हैं, इतनी महंगी चीजें उनके पास मिली हैं। उन्होंने हैरानी जताई कि अब इतना बड़ा करप्शन उत्तराखंड में होता रहा और कांग्रेस मूकदर्शक बनकर देखती रही। ऐसे में आज जब उसका पर्दाफाश हुआ है, ईडी ने वहां छापे मारे हैं और ये सब चीजें निकली हैं, तो हरीश रावत कहते हैं कि मैं इस्तीफा देता हूं।
जबकि ये तो उनके समय की जांच है, नई बात नहीं है। आज तो ईडी ने छापा मारा है, तो वहां चीजें निकली हैं। लेकिन यह विषय उसी समय स्पष्ट हो गया था कि नियुक्तियों में भ्रष्टाचार हुआ है, परीक्षाओं में भ्रष्टाचार हुआ है। स्वयं उनके द्वारा जांच बिठाई गई, पहले लीपापोती की गई, फिर दोबारा जांच बैठी, जांच में दोषी पाए गए।
उन्होंने हरदा के इस्तीफे पर सवाल उठाए कि इस पूरे घटनाक्रम में वे मुख्यमंत्री थे, लेकिन उन्होंने तब इस्तीफे की पेशकश नहीं की। उसके बाद से आज लगभग 9 साल हो गए हैं। उनको मालूम था कि भ्रष्टाचार हुआ है, लेकिन कभी बाद में भी इस्तीफे की पेशकश नहीं की। अंन्ततः जब पकड़े जाते हैं, तो फिर फजीहत से बचने के लिए इस्तीफे की पेशकश करते हैं, सहानुभूति लेने का प्रयास करते हैं। कांग्रेस को यह बताने का प्रयास करते हैं कि ‘मैं तो कांग्रेस का बड़ा सच्चा सिपाही हूं, मेरे कारण कांग्रेस पर कोई चुनाव में उस पर दुष्प्रभाव न पड़े, तो मैं इस्तीफा देता हूं’ इस तरह की बातें करते हैं। लेकिन उन्हें जवाब देना चाहिए कि उनकी नैतिक जिम्मेदारी क्या थी? जब उनके मुख्यमंत्री रहते हुए यह घोटाला सामने आ गया था, तो वहीं पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। नहीं तो कम से कम अपने पद से उसी समय इस्तीफा तो दे सकते थे।
इसी तरह उन्होंने कटाक्ष किया कि चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में ईडी की कार्रवाई के बाद मीडिया में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। उसमें बरामदगी और पार्टी फंड के लिए रकम जुटाने के दावों ने कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आज मीडिया में चंदन सिंह जीना का बयान सामने आया है कि ED द्वारा बरामद रकम अलग-अलग लोगों की ओर से कांग्रेस के पार्टी फंड के लिए दिया गया चंदा था। अब कांग्रेस को बताना चाहिए कि यह कौन-सा “चंदा मॉडल” है, जिसमें पार्टी फंड के नाम पर ओएसडी के जरिए रकम जुटाई जाती है?
कांग्रेस के कार्रवाई की टाइमिंग के सवाल पर कहा कि क्या वे चाहते हैं चुनाव के कारण कोई कार्रवाई न हो, जबकि चुनाव तो इस देश में हर दूसरे साल कहीं न कहीं चुनाव होता है।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान, सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र सिंह नेगी, संपर्क प्रमुख हरीश चमोली भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

