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चारधाम यात्रा: आस्था की दुर्गम डगर पर मौत का ‘मौन’ साया , राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक यात्रा के दौरान 53  श्रद्धालुओं ने तोड़ा दम ,केदारनाथ धाम में सबसे ज्यादा  28 जानें गई

आध्यात्मिक यात्रा में अब तक 15 लाख 63 हजार 672 श्रद्धालुओं ने चारों धामों की देहरी को चूमा 

देहरादून : उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इन दिनों श्रद्धा के सैलाब और विकट चुनौतियों के बीच एक अजीब विरोधाभास से गुजर रही है। एक ओर 19 अप्रैल से शुरू हुई इस आध्यात्मिक यात्रा में 15 लाख 63 हजार 672 श्रद्धालुओं ने चारों धामों की देहरी को चूमा है और रिकॉर्ड संख्या में भक्त उमड़ रहे हैं, तो दूसरी ओर, दुर्गम रास्तों पर मौतों का सिलसिला भी लगातार अपना काला अध्याय लिख रहा है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, अब तक यात्रा के दौरान 53 श्रद्धालुओं की अकाल मृत्यु हो चुकी है। इन मौतों का भूगोल देखें तो केदारनाथ धाम सबसे अधिक संवेदनशील बना हुआ है, जहाँ अकेले 28 जानें गई हैं। इसके बाद बद्रीनाथ में 10, यमुनोत्री में 8 और गंगोत्री में 7 भक्तों ने अपनी अंतिम सांसें लीं।
ज्यादातर मौतें स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं, अत्यधिक ठंड और हृदय गति रुकने के कारण दर्ज की गईं। प्रशासन ने बार-बार अपील की है कि बुजुर्ग और हृदय रोग, मधुमेह या उच्च रक्तचाप से पीड़ित श्रद्धालु यात्रा से पूर्व अनिवार्य स्वास्थ्य जांच कराएं। हिमालय की गोद में आस्था और जीवन के संतुलन को बनाए रखना अब यात्रियों की अपनी सतर्कता पर भी निर्भर है।
हृदय और ऊँचाई: आस्था के सामने अदृश्य शत्रु
स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जांच में स्पष्ट है कि ये मौतें किसी दुर्घटना का परिणाम नहीं, बल्कि ‘साइलेंट किलर’ का काम कर रही स्वास्थ्य जटिलताएं हैं। हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस (ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी) और हाइपरटेंशन जैसी स्थितियाँ उन बुजुर्गों और पहले से बीमार यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं, जो हिमालय की इस कठिन चढ़ाई को बिना तैयारी के पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
लापरवाही हार्ट अटैक और एल्टीट्यूड सिकनेस को दे रही आमंत्रण 
इस चिंताजनक स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा, “यात्री अक्सर अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर यात्रा पूरी करने की जल्दबाजी दिखाते हैं। यही लापरवाही हार्ट अटैक और एल्टीट्यूड सिकनेस को आमंत्रण दे रही है।”
मंत्री ने बताया कि सरकार ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा कवच मजबूत करने के प्रयास किए हैं। मार्ग पर 47 अस्पतालों की स्थापना के साथ-साथ 400 डॉक्टरों और 2820 स्वास्थ्य कर्मियों को तैनात किया गया है। पहली बार दून और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के 180 डॉक्टरों को विशेष रूप से हाई एल्टीट्यूड सिकनेस और गंभीर बीमारियों के उपचार का गहन प्रशिक्षण दिया गया है। भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सरकार अब यात्रा मार्ग पर ‘डेडिकेटेड ट्रॉमा सेंटर’ बनाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर उपचार मिल सके।
स्वास्थ्य के प्रति बरती गई लापरवाही पड़ रही भारी 
हिमालय की ऊंचाइयां केवल आस्था की परीक्षा नहीं ले रही हैं, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति बरती गई लापरवाही की भारी कीमत भी वसूल रही हैं। पिछले वर्षों के आंकड़े इस प्रवृत्ति की पुष्टि करते हैं:
• वर्ष 2024: यात्रा के दौरान कुल 246 श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई।
• वर्ष 2025: पिछले सीजन में यह आंकड़ा 83 तक पहुंचा था।

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