यूपीईएस में दो दिवसीय‘आईकेमीस 2.0’ का आयोजन:सतत भविष्य को आकार देने वाली नवीन वैज्ञानिक प्रगतियों पर गहन विचार-विमर्श
सम्मेलन में 200 से अधिक प्रतिनिधियों की रही सहभागिता
देहरादून। यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज़ (यूपीईएस) में द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन उन्नत सामग्री, ऊर्जा एवं पर्यावरणीय सततता (आईकेमीस 2.0) का सफल आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लेकर सतत भविष्य को आकार देने वाली नवीन वैज्ञानिक प्रगतियों पर गहन विचार-विमर्श किया।
अंतरविषयक संवाद के वैश्विक मंच के रूप में आयोजित इस सम्मेलन में 200 से अधिक प्रतिनिधियों की सहभागिता रही।
सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. लोक प्रताप सिंह, महानिदेशक, राष्ट्रीय परिषद सीमेंट एवं भवन सामग्री, नई दिल्ली ने किया। सम्मेलन के मुख्य संरक्षक के रूप में पद्मश्री प्रोफेसर एस. शिवराम, फेलो राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, मानद प्रोफेसर एमेरिटस, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, कोलकाता, तथा जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र, बेंगलुरु, ने मार्गदर्शन प्रदान किया। वहीं, मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित राजेंद्र सिंह सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि रहे।
इस अवसर पर यूपीईएस के कुलपति डॉ. राम शर्मा ने कहा कि आज सततता से जुड़ी चुनौतियाँ इतनी व्यापक और तात्कालिक हैं कि उन्हें किसी एक विषय के दायरे में रहकर हल नहीं किया जा सकता। शोध को अब कागज़ों तक सीमित न रहकर वास्तविक समाधान देने होंगे, जो आम जनजीवन को बेहतर बना सकें। उन्होंने कहा कि आईकेमीस 2.0 के माध्यम से यूपीईएस ऐसा ही एक मंच तैयार कर रहा है, जहां वैज्ञानिक, उद्योग जगत और अनुसंधान संस्थान आपस में संवाद कर साझा समाधान विकसित कर सकें।
दो दिवसीय सम्मेलन में तीन प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया। उन्नत सामग्री के अंतर्गत उन्नत कार्यात्मक सामग्री, नैनो सामग्री, बहुलकीय एवं जैव सामग्री, अर्धचालक, प्रकाशीय एवं सुप्रामॉलिक्यूलर सामग्री, पाईजो एवं ट्राइबो-विद्युत सामग्री तथा उत्प्रेरकों पर चर्चा हुई।
ऊर्जा क्षेत्र में ऊर्जा संचयन एवं भंडारण, नवीकरणीय एवं पारंपरिक ऊर्जा संसाधन, सुपर संधारित्र, बैटरियाँ, वैकल्पिक एवं संकर ऊर्जा प्रणालियाँ तथा ऊर्जा रूपांतरण प्रौद्योगिकियों को प्रमुखता दी गई।
वहीं पर्यावरणीय सततता के अंतर्गत हरित रसायन, अपशिष्ट प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएँ, हरित अवसंरचना, पर्यावरणीय प्रदूषण की निगरानी एवं उपचार तथा कार्बन संग्रहण, उपयोग और भंडारण जैसे अहम विषयों पर मंथन हुआ।

