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धामी कैबिनेट ने  लिया प्रदेश के 400 मदरसों को राहत देने का फैसला, एफिलिएशन में किया बदलाव , अब कक्षा एक से 8 तक की कक्षाएं संचालित होने वाले मदरसों को जिला स्तरीय शिक्षा समिति से   मिल जाएगी मान्यता 

उत्तराखंड में अब सिर्फ 52 मदरसों को ही विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर से  लेनी होगी संबद्धता
देहरादून।उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में संचालित 452 मदरसों में से 400 मदरसों को बड़ी राहत देने का निर्णय लिया है। जिसके तहत अब कक्षा एक से 8 तक की कक्षाएं संचालित होने वाले मदरसों को जिला स्तरीय शिक्षा समिति से ही मान्यता मिल जाएगी। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट के सामने रखा गया था. जिसे धामी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के तहत अक्टूबर 2025 में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम- 2025 को अधिसूचित किया गया था. जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय की ओर से स्थापित शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता एवं संस्थानों की शैक्षिक उत्कृष्टता को सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने के साथ ही अन्य कार्यों की व्यवस्था इस अधिनियम में की गई थी।
इस व्यवस्था के तहत कक्षा 1 से कक्षा 12 तक संचालित अल्पसंख्यक संस्थाओं को विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से संबद्धता लेने का प्रावधान किया गया है।वर्तमान समय में उत्तराखंड में 452 पंजीकृत मदरसे हैं. जिनमें करीब 400 से अधिक मदरसों में कक्षा 1 से कक्षा 8 तक की ही पढ़ाई कराई जाती है।ऐसे में इन मदरसों के अनुरोध और उनकी सुविधा को देखते हुए कक्षा 1 से कक्षा 8 तक का संचालन करने वाले अल्पसंख्यक संस्थाओं की संबद्धता को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया है। जिसके तहत, अब जिला स्तरीय शिक्षा समिति या फिर शासन की ओर से तय सक्षम अधिकारी द्वारा निर्धारित किया जाएगा. कक्षा 9 से 12 तक का संचालन करने वाले अल्पसंख्यक संस्थाओं को विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से संबद्धता लेना अनिवार्य होगा।अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में ये प्रावधान किया गया है कि जिन मदरसों में कक्षा एक से कक्षा 12 तक की कक्षाएं संचालित हो रही है उन मदरसों को विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से संबद्धता लेनी होगी। ऐसे में उत्तराखंड राज्य में रजिस्टर्ड 452 मदरसों में से 52 मदरसे ऐसे हैं जिनमें कक्षा 12 तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। इन मदरसों को शिक्षा परिषद से मान्यता लेनी होगी। बाकी बचे 400 मदरसों को जिला स्तरीय शिक्षा समिति से मान्यता लेनी होगी। ऐसे में इसके संशोधन को कैबिनेट ने अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने को मंजूरी दे दी है।अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण एक अंब्रेला प्राधिकरण है। जिसमें सभी 6 अल्पसंख्यकों के शिक्षा संस्थानों को मान्यता अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ही देगा, उसका एक प्रावधान ये भी था कि मदरसों समेत अन्य अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को शिक्षा परिषद से मान्यता लेनी होगी।ये सुविधा कक्षा एक से कक्षा 8 तक संचालित होने वाले मदरसों के लिए है. ऐसे में जैसे ही आवेदन प्राप्त होंगे उसका निस्तारण भी तत्काल प्रभाव से कर दिया जाएगा।

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