उत्तराखंडदेहरादून

दून बुक फेस्टिवल : प्रियंका मेहर की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, दशकों के सिर चढ़कर बोला गीतों का जादू

देहरादून। दून बुक फेस्टिवल में 9 अप्रैल का दिन विविध और रोचक आयोजनों के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। दिनभर आयोजित कार्यक्रमों में बच्चों, युवाओं और साहित्य प्रेमियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिससे पूरे परिसर में जीवंतता और रचनात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।
दिन का समापन सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ, जिसमें उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक गायिका प्रियंका मेहर की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को लोक संगीत की मधुर धुनों से सराबोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया और पूरे वातावरण को उल्लासपूर्ण बना दिया। इस प्रकार, दून बुक फेस्टिवल में 9 अप्रैल का दिन ज्ञान, रचनात्मकता और सांस्कृतिक समृद्धि के विविध रंगों से परिपूर्ण रहा।
बाल मंडप की रचनात्मक गतिविधियाँ रही विशेष आकर्षण का केंद्र
बाल मंडप में आयोजित गतिविधियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। चिल्ड्रन कॉर्नर के छठे दिन लगभग 800 छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जहाँ “ऐपन आर्ट कॉर्नर” में बच्चों ने पारंपरिक उत्तराखंडी लोक कला ऐपन को समझते और आजमाते हुए उसकी सांस्कृतिक महत्ता को जाना।
दिन की शुरुआत स्टोरी टेलर राजेश पांडेय के रोचक स्टोरीटेलिंग सत्र से हुई, जिसमें “Travelling Tree” और “A Tiny Sapling” जैसी कहानियों के माध्यम से पर्यावरण और प्रकृति के महत्व को सरल ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसके बाद डॉ. संगीता अंगोम द्वारा आयोजित पिक्शनरी गेम में बच्चों ने खेल-खेल में वन्यजीव और प्रकृति से जुड़ी जानकारियाँ हासिल कीं। बाल मंडप के दिन का समापन नेहा और आर्ची के ज़ाईन मेकिंग वर्कशॉप के साथ हुआ, जहाँ बच्चों ने अपनी कल्पनाओं को रचनात्मक रूप में अपनी पुस्तिकाओं में उकेरा, और इस तरह दिन भर की गतिविधियों ने सीखने, पढ़ने और रचनात्मकता के आनंद को जीवंत कर दिया।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर हुआ गहन विमर्श
साहित्यिक सत्रों में भी दर्शकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। चंद्रचूर घोष और अनुज धर ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन और उनसे जुड़े विभिन्न रहस्यों पर गहन चर्चा की, जिसने श्रोताओं को इतिहास के कई अनछुए पहलुओं से अवगत कराया। सुभाष चंद्र बोस पर अपने शोध और लेखन के आधार पर उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में नए अभिलेखीय स्रोत और विद्वत्तापूर्ण दृष्टिकोण सामने आए हैं, जिन्होंने स्थापित धारणाओं पर प्रश्न उठाते हुए भारत के स्वतंत्रता संग्राम को अधिक व्यापक और जटिल रूप में समझने का अवसर प्रदान किया है। इस सत्र ने श्रोताओं को एक ही कहानी तक सीमित न रहकर इतिहास को उसकी पूरी जटिलता के साथ देखने और समझने के लिए प्रेरित किया।
संजीव चोपड़ा ने भारत के इतिहास को रोचक और सहज शैली में किया पेश
लेखक, इतिहासकार और रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर संजीव चोपड़ा ने अपने सत्र में साहित्य के माध्यम से भारत के इतिहास को रोचक और सहज शैली में प्रस्तुत किया। सामजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल के साथ संवाद सत्र में संजीव चोपड़ा ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के बदलते स्वरूप और इतिहास को जानने के लिए हमें साहित्य को पढ़ना बहुत जरूरी है।

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