दून पुस्तक महोत्सव में बच्चों ने उकेरे ऐपण के रंग- ज्योति जोशी ने उत्तराखण्डी लोकजीवन में ऐपण कला के महत्व की दी जानकारी
उत्तराखण्ड को कला-साहित्य के प्रमुख केन्द्र के रूप में स्थापित करने के संकल्प को सार्थक कर रहा एनबीटी
देहरादून।दून पुस्तक महोत्सव में बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति को मंच देने के लिए स्थापित बाल मंडप उत्तराखण्डी लोककला ऐपण के रंगों से सराबोर रहा। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा बाल मंडप में ऐपण कला पर आयोजित कार्यशाला में ऐपण कलाकार ज्योति जोशी ने बच्चों को ऐपण कला की विशेषता, ऐपण परम्परा के इतिहास और उत्तराखण्डी लोकजीवन में ऐपण कला के महत्व की जानकारी भी दी। ऐपण कला की बारीकियां सीखने के बाद बच्चों ने ऐपण कलाकारी में भी बढ़चढ़ अपना हुनर दिखाया।
ऐपण प्रशिक्षक ज्योति जोशी ने बताया कि ऐपण कला का उपयोग साज सज्जा के साथ-साथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व है। उत्तराखण्ड के कुमाउं क्षेत्र में शुभ कार्य, त्योहार व जीवन के संस्कारों के दौरान घरों में ऐपण बनाई जाती है। ऐपण कला मुख्यतः घर के मुख्य द्वार, देहरी और आंगन मंे बनायी जाती है। गेरू और बिस्वार से बिंदु और रेखाओं की मदद से कमल, स्वास्तिक, शंख, सूर्य, चंद्रमा और पद्म चिन्ह जैसे डिजायन बनाए जाते हैं। कार्यशाला में स्कूली बच्चों समीक्षा, आरती रावत, नाव्या, दिव्या आदि ने प्रतिभाग कर बेहतरीन डिजायन बनाए।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास बच्चों के लिए ऐसी रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन कर उन्हें कला, साहित्य, और संस्कृति से जोड़ने का कार्य कर रहा है। न्यास का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध देवभूमि उत्तराखण्ड को साहित्य और कला के प्रमुख केन्द्र बनाने का प्रयास करना है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उत्तराखण्ड को विश्वपटल पर साहित्य और कला के प्रमुख केन्द्र रूप में स्थापित करने के संकल्प को राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा आयोजित यह महोत्सव सार्थक सिद्ध कर रहा है।

