उत्तराखंडदेहरादून

मिली जानकारी:आपात स्थिति में खाद्यान्न आपूर्ति भंडारण की उत्तराखंड में प्रयाप्त व्यवस्था, आयुष यूनिवर्सिटी में रैगिंग के बेहद कम मामले आए सामने 

राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने सदन में किए कई सवाल
देहरादून । केंद्र सरकार की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि आपतकाल की स्थिति में खाद्यान्न आपूर्ति भंडारण को लेकर उत्तराखंड में प्रयाप्त व्यवस्था है। इसी तरह प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद  महेंद्र भट्ट के संसद में पूछे गए एक अन्य सवाल में आयुष यूनिवर्सिटी में रैगिंग के बेहद कम मामले सामने आने की जानकारी दी है।
उनके द्वारा राज्यसभा के पटल पर प्रदेश में आपात स्थिति के लिए खाद्यान्न भंडारण को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी मांगी गई थी। जिसके ज़बाब में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभणिया ने बताया कि भंडारण क्षमता की आवश्यकता, अर्थात् नए गोदामों, साइलो का निर्माण, मुख्यतः चावल और गेहूं के लिए खरीद के स्तर, बफर मानदंडों की आवश्यकता और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के प्रचालनों पर निर्भर करता है। सरकार भंडारण अंतराल का निरंतर आकलन और निगरानी करती है और इसके आधार पर, भारतीय खाद्य निगम केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) के माध्यम से निम्नलिखित योजनाओं द्वारा भंडारण क्षमताएं सृजित या किराए पर ली जाती हैं। उत्तराखंड में वर्तमान में उपलब्ध भंडारण क्षमता की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड सरकार के स्वामित्व वाली पहाड़ी क्षेत्र के गोदामों में 0.53 लाख टन, गैर-पहाडी क्षेत्र 1.52 लाख टन, एफसीआई के पर्वतीय गोदामों में 0.015 और गैर पर्वतीय क्षेत्रों में 2.039 लाख टन भंडारण क्षमता मौजूद है। इसके अलावा, वर्तमान में उत्तराखंड राज्य में केंद्रीय भंडारण निगम के पास कुल 95698 टन क्षमता वाले 7 गोदाम हैं।
इसी तरह आयुष मेडिकल कालेजों में रैगिंग को लेकर नीतियों की जानकारी मांगने पर आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  प्रतापराव जाधव ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उनके द्वारा बताया गया कि वर्तमान वर्ष के दौरान, देश भर के सरकारी आयुष मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग के कुल पांच 5 मामले सामने आए हैं। आयुष मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग को रोकने के लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग समय-समय पर सभी आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और सोवा-रिग्पा कॉलेजों, संस्थानों को एंटी रैगिंग प्रयासों को मजबूत करने और रैगिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का सख्ती से पालन करने के निर्देश जारी कर रहे हैं। इसके अलावा, एनसीआईएसएम ने विश्ववि‌द्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार एंटी रैगिंग समिति और एंटी-रैगिंग दस्ते के गठन के लिए विनियम भी अधिसूचित किए हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग ने विनियम अधिसूचित किए हैं, जिसमें नए प्रवेशित स्नातक छात्रों के लिए अनिवार्य फाउंडेशन कार्यक्रम के दौरान “रैगिंग नीति पर प्रस्तुतीकरण और छात्रों के साथ संवादात्मक चर्चा” जैसी गतिविधियों को अनिवार्य किया है।

इसके अलावा, यूजीसी द्वारा बुनियादी उपायों, परामर्श और निगरानी उपायों और रैगिंग मुक्त परिसर बनाए रखने के संबंध में जारी दिशानिर्देशों और कार्य बिंदुओं को समय-समय पर संस्थानों को परिचालित किया जाता है। उक्त दिशानिर्देशों के अनुसार, सभी कॉलेजों द्वारा एक एंटी रैगिंग समिति का गठन किया जाना और शिकायत दर्ज करने के लिए स्थापित किए गए तंत्र का व्यापक प्रचार किया जाना आवश्यक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *