नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सीएम धामी को लिखा पत्र- कहा – 21 दिन व 3 सोमवार के साथ बुलाया जाए बजट सत्र
बोले – कम अवधि के चलते जनप्रतिनिधियों को समस्याएं उठाने का नही मिलता समय
देहरादून। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार विधानसभा के माध्यम से जनता के प्रति जवाबदेह होती है। प्रश्नकाल और संसदीय नियमों के तहत विधायक अपने-अपने क्षेत्रों और राज्य से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते हैं। ऐसे में विधानसभा का नियमित और पर्याप्त अवधि तक संचालन बेहद आवश्यक है।
वर्तमान पंचम विधानसभा, जो 29 मार्च 2022 से प्रारंभ हुई, अब तक 9 सत्रों के साथ केवल 32 कार्य दिवस ही संचालित कर सकी है। अन्य राज्यों की तुलना में यह संख्या काफी कम मानी जा रही है। खास बात यह है कि इन 32 उपवेशनों में एक भी सोमवार प्रश्नकाल सहित निर्धारित नहीं हुआ, जबकि चतुर्थ और पंचम विधानसभा की परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री से जुड़े विभागों के प्रश्नों के लिए सोमवार तय रहता है।
मुख्यमंत्री के पास राज्य के लगभग 75 विभागों में से करीब 40 महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी है। इनमें गृह, पेयजल, आपदा प्रबंधन, ऊर्जा, औद्योगिक विकास, शहरी विकास, भ्रष्टाचार उन्मूलन और संसदीय कार्य जैसे अहम विभाग शामिल हैं। सोमवार को प्रश्नकाल न होने के कारण कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, आपदा तैयारियों और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व बिजली आपूर्ति जैसे गंभीर मुद्दों पर समुचित चर्चा और जवाब नहीं मिल पाए हैं।
अधिकांश सत्र केवल दो या तीन दिन ही चले, जिससे अन्य मंत्रियों के विभागों से जुड़े निर्धारित प्रश्न दिवस भी नहीं आ सके। इससे जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्याएं प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर सीमित रहा।
इसी बीच राज्य का बजट सत्र शीघ्र प्रस्तावित है। इस सत्र में बजट भाषण, सामान्य चर्चा, विभागवार अनुदान मांगों पर विचार और वित्त विधेयक जैसे महत्वपूर्ण कार्य संपन्न होने हैं। ऐसे में सत्र की अवधि पर्याप्त होना और भी जरूरी हो जाता है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए वरिष्ठ नेता यशपाल आर्य ने आगामी बजट सत्र को न्यूनतम 21 दिनों तक और कम से कम तीन सोमवारों सहित बुलाने की मांग की है, ताकि प्रश्नकाल के माध्यम से सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती मिल सके।
देहरादून। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार विधानसभा के माध्यम से जनता के प्रति जवाबदेह होती है। प्रश्नकाल और संसदीय नियमों के तहत विधायक अपने-अपने क्षेत्रों और राज्य से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते हैं। ऐसे में विधानसभा का नियमित और पर्याप्त अवधि तक संचालन बेहद आवश्यक है।
वर्तमान पंचम विधानसभा, जो 29 मार्च 2022 से प्रारंभ हुई, अब तक 9 सत्रों के साथ केवल 32 कार्य दिवस ही संचालित कर सकी है। अन्य राज्यों की तुलना में यह संख्या काफी कम मानी जा रही है। खास बात यह है कि इन 32 उपवेशनों में एक भी सोमवार प्रश्नकाल सहित निर्धारित नहीं हुआ, जबकि चतुर्थ और पंचम विधानसभा की परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री से जुड़े विभागों के प्रश्नों के लिए सोमवार तय रहता है।
मुख्यमंत्री के पास राज्य के लगभग 75 विभागों में से करीब 40 महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी है। इनमें गृह, पेयजल, आपदा प्रबंधन, ऊर्जा, औद्योगिक विकास, शहरी विकास, भ्रष्टाचार उन्मूलन और संसदीय कार्य जैसे अहम विभाग शामिल हैं। सोमवार को प्रश्नकाल न होने के कारण कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, आपदा तैयारियों और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व बिजली आपूर्ति जैसे गंभीर मुद्दों पर समुचित चर्चा और जवाब नहीं मिल पाए हैं।
अधिकांश सत्र केवल दो या तीन दिन ही चले, जिससे अन्य मंत्रियों के विभागों से जुड़े निर्धारित प्रश्न दिवस भी नहीं आ सके। इससे जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्याएं प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर सीमित रहा।
इसी बीच राज्य का बजट सत्र शीघ्र प्रस्तावित है। इस सत्र में बजट भाषण, सामान्य चर्चा, विभागवार अनुदान मांगों पर विचार और वित्त विधेयक जैसे महत्वपूर्ण कार्य संपन्न होने हैं। ऐसे में सत्र की अवधि पर्याप्त होना और भी जरूरी हो जाता है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए वरिष्ठ नेता यशपाल आर्य ने आगामी बजट सत्र को न्यूनतम 21 दिनों तक और कम से कम तीन सोमवारों सहित बुलाने की मांग की है, ताकि प्रश्नकाल के माध्यम से सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती मिल सके।

