शहर क़ाज़ी मुफ़्ती हशीम क़ासमी ने कहा – इंसाफ़ किसी भी सभ्य समाज की नैतिक रीढ़ , क़ानून का शासन हर हाल में कायम रहना चाहिए
कहा – इंसाफ़, अमन और संविधान के दायरे में हो समाधान,
इंसाफ़, सामाजिक सौहार्द और संविधानिक मूल्यों को सर्वोपरि रखने का दिया गया संदेश
देहरादून। शहर देहरादून की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में शहर क़ाज़ी की अगुवाई में आयोजित प्रेस वार्ता में इंसाफ़, सामाजिक सौहार्द और संविधानिक मूल्यों को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया गया। शहर क़ाज़ी हज़रत मुफ़्ती हशीम अहमद क़ासमी ने कहा कि इंसाफ़ किसी भी सभ्य समाज की नैतिक रीढ़ है और क़ानून का शासन हर हाल में कायम रहना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर क़ाज़ी की सरपरस्ती में गठित शूरा कमेटी की ज़िम्मेदारी हज़रत मुफ़्ती सलीम अहमद क़ासमी को सौंपी गई है, जिसका उद्देश्य राजनीति नहीं बल्कि संविधान के दायरे में रहकर समाज की भलाई और अमन कायम रखना है। उन्होंने चेताया कि खुद-साख़्ता इंसाफ़ सामाजिक संतुलन को बिगाड़ता है और विवादों का समाधान केवल विधिसम्मत तरीकों से ही होना चाहिए।
प्रेस को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देहरादून और उत्तराखंड की पहचान अमन-ओ-अमान से रही है, इसे हर हाल में बरकरार रखा जाएगा। सरकार और न्यायपालिका से कानून के शासन को और मज़बूत करने तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की गई।
इस मौके पर मुफ्ती सलीम अहमद क़ासमी, दिलशाद अहमद कुरैशी, पार्षद मुकीम अहमद, मुफ्ती ताहिर कासमी, आतिफ शेख़, नसीम अहमद, अब्दुल रहमान (शब्लू), सय्यद मौ. अरशी, हाकिम खान, आसिफ कुरैशी, हाजी शमशाद, मौ आरिफ, असगर खान, सलीम अहमद, सुलेमान अंसारी, फहीम अहमद आदि मौजूद रहे।

