उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने वीर बाल दिवस, 2025 पर किया कार्यक्रम का आयोजन – अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना ने कहा – साहिबजादों की शहादत आज के समाज के लिए एक जीवंत संदेश
उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के कार्यक्रम में सीएम धामी व कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य हुए शामिल ,
विभिन्न क्षेत्रों में अपना उत्कृष्ठ प्रर्दशन देने वाले 8 बच्चों को दिए गए पुरस्कार
देहरादून।उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने वीर बाल दिवस, 2025 के पावन अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन आईआरडीटी ऑडिटोरियम, देहरादून में किया । कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य साहिबजादा जोरावर सिंह एवं साहिबजादा फतेह सिंह के अद्वितीय साहस, बलिदान और अटूट आस्था को नमन करते हुए बच्चों में साहस, नैतिक मूल्यों, आत्मसम्मान तथा अधिकारों के प्रति जागरूकता का प्रसार करना था। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने न केवल उनके शौर्य का स्मरण कराया, बल्कि वर्तमान समय में बच्चों के अधिकारों की रक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण के महत्व को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण वीर बाल दिवस पर आधारित संगीतमय कार्यक्रम रहा। कार्यक्रम में गुरमत संगीत बाल विद्यालय, हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के विद्यार्थियों ने गुरुबाणी कीर्तन की आध्यात्मिक प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम में डा शिव कुमार बरनवाल, सचिव, उत्तरााखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग, डा सतीश कुमार सिंह, अनुसचिव, उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग, नरेन्द्रजीत सिंह बिंद्रा ,अध्यक्ष, हेमकुण्ड सहिब ट्रस्ट/पूर्व अध्यक्ष, अल्पसंख्यक आयोग, विनोद कपरवाण पूर्व सदस्य, उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग, अभिनव शाह, मुख्य विकास अधिकारी, देहरादून, पीएल भारती, शिक्षा विभाग व आयोग की टीम उपस्थित रही।
आयोग अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किया । उन्होंने वीर बाल दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहिबजादों की शहादत केवल अतीत की घटना नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए एक जीवंत संदेश है। उन्होंने बच्चों के अधिकारों, शिक्षा, संरक्षण, सम्मान और सहभागिता पर विस्तार से चर्चा की तथा कहा कि आयोग बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं सुरक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
वीर बाल दिवस अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अनुपम बलिदान की स्मृृति का प्रतीक : सीएम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आर्शीवचन पत्र के माध्यम से कहा कि वीर बाल दिवस उन महान वीर बालकों के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अनुपम बलिदान की स्मृृति का प्रतीक है, जिन्होनें अल्प आयु में भी अन्याय, अत्याचार और अधर्म के विरूद्ध खडे होकर सत्य और धर्म की रक्षा के लिये अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया। सहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह जैसे वीर बाल इतिहास के पन्नों में ही नही बल्कि राष्ट्र की आत्मा मे सदैव अमर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें आशा है कि उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा अपने उद्देश्यों के अनुरूप बच्चों के अधिकारों की रक्षा, जागरूकता के प्रसार तथा संवेदनशील मामलों में सक्रिय हस्तक्षेप की दिशा में किये जा रहे कार्यो के क्रम में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, जो कि बच्चों में निसंदेह आत्मविश्वास, नैतिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों एंव कर्तव्यों केे प्रति चेतना विकसित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। उन्होेने कहा कि राज्य सरकार बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त वातावरण प्रदान करने के लिये पूर्णतः प्रतिबद्ध रहेगी।
वीर बाल दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि संकल्प का दिन:रेखा आर्य
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग
रेखा आर्य ने विशिष्ट अतिथि के रूप में साहिबजादों के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है। संकल्प कि हर बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और अवसरों से भरपूर भविष्य मिलेगा। उन्होंने बच्चों को देश का उज्ज्वल भविष्य बताते हुए उन्हें आत्मविश्वास और मूल्यों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपना उत्कृष्ठ प्रर्दशन देने वाले 8 बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए। पुस्कार प्राप्त करने वाले बच्चों में दनिराजा त्रिपुरा, टेबल टेनिस, हेम्फु सारमोन एंग्धी निबंध लेखन, सूरज देववर्मा, खेल, अंकित पटेल, खेल, वैष्णी सिंह द्वारा योग में तथा तीन बच्चों (वैष्णी सिंह, यमायर तोमर व योहाना तोमर द्वारा शूटिंग में) द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर अपना सर्वोच्च प्रर्दशन दिया गया हैं।
विभिन्न क्षेत्रों में अपना उत्कृष्ठ प्रर्दशन देने वाले 8 बच्चों को दिए गए पुरस्कार
देहरादून।उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने वीर बाल दिवस, 2025 के पावन अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन आईआरडीटी ऑडिटोरियम, देहरादून में किया । कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य साहिबजादा जोरावर सिंह एवं साहिबजादा फतेह सिंह के अद्वितीय साहस, बलिदान और अटूट आस्था को नमन करते हुए बच्चों में साहस, नैतिक मूल्यों, आत्मसम्मान तथा अधिकारों के प्रति जागरूकता का प्रसार करना था। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने न केवल उनके शौर्य का स्मरण कराया, बल्कि वर्तमान समय में बच्चों के अधिकारों की रक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण के महत्व को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण वीर बाल दिवस पर आधारित संगीतमय कार्यक्रम रहा। कार्यक्रम में गुरमत संगीत बाल विद्यालय, हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के विद्यार्थियों ने गुरुबाणी कीर्तन की आध्यात्मिक प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम में डा शिव कुमार बरनवाल, सचिव, उत्तरााखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग, डा सतीश कुमार सिंह, अनुसचिव, उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग, नरेन्द्रजीत सिंह बिंद्रा ,अध्यक्ष, हेमकुण्ड सहिब ट्रस्ट/पूर्व अध्यक्ष, अल्पसंख्यक आयोग, विनोद कपरवाण पूर्व सदस्य, उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग, अभिनव शाह, मुख्य विकास अधिकारी, देहरादून, पीएल भारती, शिक्षा विभाग व आयोग की टीम उपस्थित रही।
आयोग अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किया । उन्होंने वीर बाल दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहिबजादों की शहादत केवल अतीत की घटना नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए एक जीवंत संदेश है। उन्होंने बच्चों के अधिकारों, शिक्षा, संरक्षण, सम्मान और सहभागिता पर विस्तार से चर्चा की तथा कहा कि आयोग बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं सुरक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
वीर बाल दिवस अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अनुपम बलिदान की स्मृृति का प्रतीक : सीएम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आर्शीवचन पत्र के माध्यम से कहा कि वीर बाल दिवस उन महान वीर बालकों के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अनुपम बलिदान की स्मृृति का प्रतीक है, जिन्होनें अल्प आयु में भी अन्याय, अत्याचार और अधर्म के विरूद्ध खडे होकर सत्य और धर्म की रक्षा के लिये अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया। सहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह जैसे वीर बाल इतिहास के पन्नों में ही नही बल्कि राष्ट्र की आत्मा मे सदैव अमर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें आशा है कि उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा अपने उद्देश्यों के अनुरूप बच्चों के अधिकारों की रक्षा, जागरूकता के प्रसार तथा संवेदनशील मामलों में सक्रिय हस्तक्षेप की दिशा में किये जा रहे कार्यो के क्रम में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, जो कि बच्चों में निसंदेह आत्मविश्वास, नैतिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों एंव कर्तव्यों केे प्रति चेतना विकसित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। उन्होेने कहा कि राज्य सरकार बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त वातावरण प्रदान करने के लिये पूर्णतः प्रतिबद्ध रहेगी।
वीर बाल दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि संकल्प का दिन:रेखा आर्य
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग
रेखा आर्य ने विशिष्ट अतिथि के रूप में साहिबजादों के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है। संकल्प कि हर बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और अवसरों से भरपूर भविष्य मिलेगा। उन्होंने बच्चों को देश का उज्ज्वल भविष्य बताते हुए उन्हें आत्मविश्वास और मूल्यों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपना उत्कृष्ठ प्रर्दशन देने वाले 8 बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए। पुस्कार प्राप्त करने वाले बच्चों में दनिराजा त्रिपुरा, टेबल टेनिस, हेम्फु सारमोन एंग्धी निबंध लेखन, सूरज देववर्मा, खेल, अंकित पटेल, खेल, वैष्णी सिंह द्वारा योग में तथा तीन बच्चों (वैष्णी सिंह, यमायर तोमर व योहाना तोमर द्वारा शूटिंग में) द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर अपना सर्वोच्च प्रर्दशन दिया गया हैं।

