उत्तराखंडदेहरादून

बाल आयोग अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना ने उत्तराखंड में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, बाल अपराधों की रोकथाम व संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर दिया जोर

बाल आयोग अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना  की अध्यक्षता में हुई बाल कल्याण समिति,  किशोर न्याय बोर्ड, एवं चाइल्ड हेल्पलाइन के साथ समन्वय व समीक्षा बैठक
देहरादून।उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की  अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना की अध्यक्षता में मंगलवार को आईसीडीएस, सभागार, नन्दा की चौकी में बाल कल्याण के अंतर्गत संचालित संस्थाओं की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी), एवं चाइल्ड हेल्पलाइन के साथ एक समन्वय व समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का उद्देश्य राज्य में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, बाल अपराधों की रोकथाम तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा।
बैठक में आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल, अनुसचिव डॉ. सतीश कुमार सिंह, मुख्य परिवीक्षा अधिकारी अंजना गुप्ता, डब्लूसीडी उत्तराखण्ड, अध्यक्ष/सदस्य, बाल कल्याण समिति हरिद्वार, सभी जनपदों की बाल कल्याण समिति ने आन-लाईन/आफ-लाईन प्रतिभाग किया गया, जिसमें निम्न पर चर्चा की गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा– बाल कल्याण समिति के नवगठित सदस्यों को कार्यों के निर्वहन के लिए प्रशिक्षण की स्थिति की जानकारी ली गई। सीपीओ महिला कल्याण  अंजना गुप्ता ने बताया कि राज्य के सभी जनपदों में प्रशिक्षण कार्य पूर्ण करा लिया गया है।
पोक्सो मामलों में वृद्धि- विभिन्न जनपदों से रिपोर्ट प्राप्त हुई कि 12 से 17 वर्ष के किशोरों के घर से भागने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिनका प्रमुख कारण सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की लत है। पोक्सो अधिनियम के अंतर्गत दर्ज मामलों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि होना बताया गया है।
स्पॉन्सरशिप योजना की स्थिति- अनाथ बच्चों को छः माह बाद भी योजनाओं का लाभ न मिलने की समस्या उठाई गई। सीपीओ द्वारा बताया गया कि मिशन वात्सल्य के पोर्टल पर पंजीकरण के बाद ही लाभ दिया जा रहा है और जल्द ही सभी पात्र बच्चों के खातों में राशि पहुंचाई जाएगी।
पोक्सो से पीडित बालिकाओं को आर्थिक सहायता या अन्य कोई लाभ दिये जाने के सम्बन्ध में  सीपीओ ने  बताया कि पोक्सो से पीड़ित बालिकाओं को एफआईआर व मेडिकल रिपोर्ट की प्रति संलग्न कर प्रति माह 6000 की आर्थिक सहायता वर्ष 18 की होने तक प्रदान की जा रही है।
बाल विवाह पर त्वरित कार्यवाही- चमोली जनपद में सामने आए बाल विवाह के एक मामले में बाल कल्याण समिति द्वारा त्वरित कार्रवाई कर विवाह को रोका गया, जिस पर बाल आयोग डॉ गीता खन्ना अध्यक्ष द्वारा सराहना की गई।
पौड़ी जनपद की विस्तृत रिपोर्ट- बालश्रम, भिक्षावृति, बाल विवाह, चाइल्ड ट्रैफिकिंग जैसी गंभीर समस्याओं पर आंकड़ों सहित रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
ऊधमसिंहनगर में गंभीर प्रकरण पर नाराजगी- जिले में एक बालक की आंख फोड़ने की घटना पर बाल कल्याण समिति द्वारा त्वरित कार्रवाई न किए जाने पर आयोग अध्यक्ष ने गहरा रोष प्रकट किया और सभी जिलों को संवेदनशील मामलों में शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
माहवार बैठक और कार्यवाही रिपोर्ट में यह तय किया गया कि सभी जनपदों में बाल कल्याण समितियां नियमित मासिक बैठकें आयोजित कर कार्यवाही रिपोर्ट तैयार करें एवं आयोग को प्रेषित करें।
बाल सुरक्षा पर जन-जागरूकता- सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल द्वारा निर्देशित किया गया कि सभी प्रमुख स्थलों पर फ्लैक्स, पोस्टर आदि के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए।
बाल आयोग अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना ने दिए कई अहम निर्देश
बाल आयोग अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना द्वारा सभी जनपदों को दिये गये कि प्रत्येक माह की 10 तारीख तक फॉर्म 46 (पृष्ठ संख्या 272, जेजेबी पुस्तक) के अनुसार रिपोर्ट तैयार कर डीपीओ के माध्यम से आयोग को प्रेषित की जाए, सभी रिपोर्ट को बाक्स फाइल में संग्रहित करते हुये आयोग को भी प्रेषित की जाये, महिला कल्याण विभाग व सीडब्ल्यूसी की संयुक्त मासिक बैठक सुनिश्चित की जाए, जनपद में मेलों में बाल कल्याण समिति का स्टॉल लगाकर योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाए, सभी डीपीओ द्वारा बाल कल्याण समिति को 6 सीयूजी नंबर उपलब्ध कराए जाएं, अनाथ व पीड़ित बच्चों को कौशल विकास योजना से जोड़ा जाए तथा एकल माता को भी राज्य योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाए, पोक्सो पीड़ितों को समय पर सहायता राशि मिले और मामलों के निस्तारण के उपरांत भी काउंसलिंग जारी रखी जाए, चाइल्ड केयर संस्थानों से जुड़े मामलों में डीपीओ द्वारा जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के साथ त्रैमासिक बैठक की जाए तथा कार्यवाही रिपोर्ट आयोग को भेजी जाए। आयोग अध्यक्ष  डा गीता खन्ना द्वारा समीक्षा बैठक में बाल अधिकारों की सुरक्षा, बच्चों का हित, तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक सार्थक कदम उठाने पर जोर दिया गया तथा बाल कल्याण समिति को बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए सभी कार्य शीघ्रता से पूरे किए जाने के लिए निर्देशित किया गया, ताकि उत्तराखण्ड राज्य अनाथ, पीड़ित व असहाय बच्चों के लिए एक सुरक्षित और सशक्त वातावरण सुनिश्चित कर सके।

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