उत्तरकाशी आपदा : लापता 67 लोगों को ‘मृत’ घोषित करने को गृह मंत्रालय की हरी झंडी
आपदा के 51 दिन बाद भी 67 लोगों का
नहीं चल पाया कोई पता,
तत्काल सहायता का मार्ग हुआ प्रशस्त
देहरादून। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में अगस्त माह में आई विनाशकारी आपदा ने कई परिवारों की खुशियाँ छीन लीं। धराली और हर्षिल क्षेत्र में खीर गंगा में आए भीषण मलबे के कारण लापता हुए 67 लोगों का 51 दिनों के अथक प्रयासों के बावजूद कोई पता नहीं चल पाया है। इन अनिश्चितताओं के बीच, केंद्र सरकार ने पीड़ितों के परिवारों को बड़ी राहत देते हुए, इन लापता व्यक्तियों का मृत्यु पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी करने की मंजूरी दे दी है।
यह निर्णय राज्य सरकार द्वारा जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 के प्रावधानों में छूट देने के लिए भेजे गए प्रस्ताव के बाद आया है। इस मंजूरी के बाद, लापता लोगों के परिजनों को आपदा राहत के तहत आवश्यक आर्थिक सहायता मिल सकेगी, जो अब तक प्रमाण पत्र न होने के कारण रुकी हुई थी।
राज्य सरकार ने तुरंत इस प्रक्रिया को अमल में लाते हुए संबंधित अधिकारियों को नामित कर दिया है। सचिव स्वास्थ्य, डॉ. आर. राजेश कुमार ने पुष्टि करते हुए बताया कि मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया के लिए उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को ‘अभिहित अधिकारी’ और जिलाधिकारी को ‘अपीलीय अधिकारी’ नामित किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य परिस्थितियों में, जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 के तहत किसी लापता व्यक्ति को मृतक घोषित करने के लिए सात साल तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं की गंभीरता को देखते हुए केंद्र ने इस नियम में छूट दी है।

