मसूरी जॉर्ज एवरेस्ट भूमि आवंटन की नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने की जांच की मांग, पर्यटन विकास परिषद के फैसले पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
142 एकड़ भूमि 1 करोड़ के किराए पर देने का मामला गरमाया
देहरादून । मसूरी में जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र में कई सौ बीघा जमीन को किराए पर देने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस ने इस मामले में सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मांग की है कि इस सम्पूर्ण टेंडर आवंटन की सीबीआई अथवा रिटायर्ड न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी से जांच की जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हो तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार की सारी हदें पार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में आहूत हुए विधानसभा सत्र में मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट इलाके में 30 हजार करोड़ बाजार मूल्य वाली पर्यटन विभाग की जमीन 1 करोड़ रुपए सालाना किराए पर देने का मामला प्रमुखता से उठाया था । ये जमीन जिस कंपनी को दी गई थी वह कंपनी बाबा रामदेव की पतंजलि से संबंध रखती थी। आर्य ने कहा कि आज दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबार ने इस खबर को छापा है। इससे अरबों रुपए के पर्यटन से जुड़े ठेके को हथियाने के लिए किए गए फर्जीवाड़े की पोल खोल दी है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उत्तराखंड टूरिज्म बोर्ड ने मसूरी में एडवेंचर टूरिज्म के लिए एक टेंडर निकाला। टेंडर हासिल करने वाले को 142 एकड़ में फैले स्पॉट में जिसमें म्यूजियम, ऑब्जर्वेटरी, कैफेटेरिया, स्पोर्ट्स एरिया, पार्किंग आदि सबके प्रबंधन का जिम्मा मिलना था। उन्होने कहा है कि, इस जमीन में से 142 एकड़ भूमि ( 762 बीघा या 2862 नाली या 5744566 वर्ग मीटर ) को उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद के उप कार्यकारी अधिकारी ने ‘‘ राजस एरो स्पोर्टस एण्ड एडवैंचर प्राईवेट लिमिटेड’’ को केवल 1 करोड़ रुपए सालाना किराए पर दिया । बताते हैं कि, मौके पर कंपनी ने 1000 वीघा जमीन कब्जाई है। आर्य ने आरोप लगाया कि महज एक करोड़ रुपए सालाना के शुल्क साथ बालकृष्ण की कंपनी ने यह टेंडर हासिल कर दिया। कहा कि अदभुत यह रहा दूसरे तीसरे नंबर पर भी टेंडर में जिन कंपनियों के नाम आए उनकी मिलकीयत भी बालकृष्ण के पास है।
उन्होंने कहा कि कब्जे वाले हिस्से का छोड़ भी दे तो इस 762 बीघा भूमि याने 5744566 वर्ग मीटर भूमि का सरकारी रेटों से मूल्य आज के समय 2757,91,71,840 रुपया ( 2757 करोड) के लगभग है। जमीन का यह रेट सरकारी सर्किल रेट के अनुसार है। व्यवसायिक जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य आम तौर पर इसके चार गुना और व्यवसायिक या पर्यटक स्थलों पर 10 गुना तक होता है। यानी ये जमीन 30 हजार करोड़ तक के मूल्य की हो सकती थी । उन्होंने कहा कि ये राज्य की जनता के साथ बहुत बड़ा धोखा और राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है।

