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भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने कहा -पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का दर्द कांग्रेस का असली अलोकतांत्रिक चेहरा, अपनी नाकामयाबियों को छिपाने के लिए हरदा खेल रहे सहानुभूति कार्ड

कहा – कांग्रेस में विधायकों की इच्छा से नही चुना जाता नेता, हरदा के दावे से निकला सच
देहरादून । भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस नेता हरीश रावत के खुद के बहुमत और जनसमर्थन के दावे के बाद भी सीएम पद से दरकिनार किये जाने से यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या कांग्रेस में नेता चयन में विधायकों की इच्छा का सम्मान नही किया जाता है? वहाँ अलोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत नेतृत्व थोपा जाता है और यह जनादेश का अपमान है। उन्होंने कहा कि हरदा अपनी नाकामयाबियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं और सहानुभूति पाने की फिराक में लगे हैं।
पूर्व सीएम के दावे पर चौहान ने कहा कि विधायकों के समर्थन के बावजूद सीएम नहीं बनाने वाले हरदा का दर्द कांग्रेस का असली अलोकतांत्रिक चेहरा है। उन्होंने कहा कि जनता की याददाश्त बहुत अच्छी है, उन्हें अपनी सरकार में हरदा की धरने, प्रदर्शन और लेटर बम की राजनीति भी अच्छी तरह याद है। हरदा का ये कहना कि उनके पक्ष में विधायकों का बहुमत था, लेकिन किसी और को मुख्यमंत्री बनाया, कांग्रेस के अंदरूनी लोकतंत्र की पोल खोलता है। सभी जानते हैं, वहां न नेताओं की पूछ है और न कार्यकर्ताओं की व  नेतृत्व थोपा जाता है। यह बात तो हरीश रावत भी जानते थे, लिहाजा पार्टी या जनता के लिए नही बल्कि सत्ता के लालच में उन्होंने तिवारी और विजय बहुगुणा को स्वीकारा था। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी चौहान ने कहा कि वह समय समय पर सहानुभूति का कार्ड खेलते रहे हैं, लेकिन कांग्रेस मे ही एक बड़ा वर्ग उनके इस खेल से वाक़िफ़ है और उनकी बात पर विश्वास नही करता। वहीं जनता भी सच जानती है। हरदा चुनाव से पहले मुस्लिम यूनिवर्सिटी पर यात्रा, कभी धार्मिक स्थलों की सैर और अब खुद के साथ अन्याय को प्रचारित कर नई जमीन तलाशने की जगत में लगे है। जनता उनके इस खेल को कभी स्वीकार नही करेगी।
बोले – हरदा को जनता की याददाश्त पर भरोसा नही
भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने कहा कि हरदा को जनता की याददाश्त पर भरोसा नही है। आज वे 2002 और 2012 का दौर भूलने का नाटक कर रहे हैं, लेकिन जनता के जहन में सब कुछ ताजा है। किस तरह तिवारी सरकार के समानांतर धरने प्रदर्शन किए गए और  लेटर बम की राजनीति को अंजाम दिया गया। उनकी राजनीति से स्पष्ट था कि विजय बहुगुणा को उन्होंने कभी भी मुख्यमंत्री नही माना। इसलिए त्याग, तपस्या, नैतिकता जैसे शब्द उनके लिए बने ही नही हैं। जनता ने उन्हें कम उम्र में सांसद, विधायक, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री प्रत्येक अहम जिम्मेदारी देकर हमेशा धोखा ही पाया है। लिहाजा राजनीति में उनका घड़ियाली आंसू बहाने का समय उस समय ही चला गया था, जब अपनी सरकार बचाने के लिए उन्होंने तमाम हथकंडे अपनाये और  लूट का लाइसेंस देते दिखे।

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