उत्तराखंड जनजाति कल्याण समिति की बैठक में कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा, जनजातियों से संबंधित मामलों के बारे में दी गई जानकारी
जनपद चंपावत की जनजाति महिला प्रधान के विरुद्ध उत्पीड़न करने वाले मामले में वाद की दी गई जानकारी,
राजि महिला का बलात्कार कर हत्या के मामले में
राष्ट्रीय जनजाति आयोग दिल्ली की कार्यवाही पर जताया संतोष, यूसीसी से जनजातियों को बाहर रखने पर जताया मुख्यमंत्री का आभार
देहरादून। उत्तराखंड जनजाति कल्याण समिति (रजि.) देहरादून की कार्यकारिणी व आमंत्रित सदस्यों की बैठक देहरादून में समिति के अध्यक्ष अजय सिंह नबियाल (से.नि.आई.ए.एस.) की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई I समिति के एन एस नपल्च्याल पूर्व मुख्य सचिव उत्तराखण्ड भी उपस्थित थे।
बैठक में समिति के महासचिव कुंदन सिंह राठौर ने विगत बैठक की कार्यवाही का वाचन किया और मुख्यमंत्री के द्वारा समिति के कार्यालय, सभागार के लिये नि:शुल्क भूमि आवंटन, जनपद चम्पावत की जनजाति महिला प्रधान के विरूद्ध उत्पीड़न करने वाले आरोपियों के विरुद्ध जिला न्यायालय चम्पावत मे गतिमान वाद की अद्यतन प्रगति की जानकारी दी गईं I राजि महिला का बलात्कार कर हत्या के मामले में समिति की पहल पर राष्ट्रीय जनजाति आयोग दिल्ली ने संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी/पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ से रिपोर्ट तलब की गई, जिस पर संतोष जताया गया।
बैठक में पांचों जनजातियों से सम्बन्धित महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गईं I जनजातियों के भूमि एवं उनके परम्परागत पड़ावों मे गैर जनजाति के व्यक्तियों के द्वारा किये गये अतिक्रमण से उत्पन्न समस्याओं को गंभीरता से लिया गया। विचार विमर्श के बाद अतिक्रमणकर्ता के विरूद्ध सशक्त आवाज उठाने एवं जनजातियों को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिये समिति के संरक्षक की अध्यक्षता में पांचों जनजातियों के सेवानिवृत्त पुलिस एवं सिविल सेवा के अनुभवी अधिकारियों को शामिल करते हुए एक थिंक टैंक एवं लीगल सेल का गठन किया गया ,जो समाज के पीड़ित व्यक्ति के विरूद्ध उत्पीड़न एव संविधान प्रदत्त अधिकारों के हनन की दशा में त्वरित विधिक सहायता भी प्रदान करेंगे I
उत्तराखण्ड की पांचों जनजातियों ने मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया।समिति ने बुक्सा तथा राजिंदर जनजाति के मध्य जागरूकता बढ़ाये जाने के उद्देश्य से शीघ्र ही एक गोष्ठी हरिद्वार अथवा उधम सिंह नगर में की जायेगी।
समिति ने निर्णय लिया कि पांचों जनजातियों की दिवंगत विभूतियों तथा शोधार्थियों द्वारा किये गये शोध पत्रों का संकलन किया जाये, इसके लिये अलग-अलग समितियों का गठन किया गया।बैठक में समिति के पदाधिकारियों के अतिरिक्त विशेष आमंत्रित सदस्यगण चंद्रसिंह नपल्च्याल पूर्व आईएएस , कलम सिंह चौहान संयुक्त निदेशक सूचना विभाग, जगत सिंह चौहान निदेशक वित पर्यटन विभाग, नर सिंह नपल्च्याल महासचिव आरकेएस , डॉ यूएस रावत पूर्व कुलपति, टीकम सिंह चौहान जिला चकबंदी अधिकारी हरिद्वार, यतींद्र पांगती, गंगा सिंह पांगती, बलवन्त सिंह पवार अध्यक्ष बुक्सा आदिम जाति उत्थान समिति तथा पांचों जनजातियों के जन प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी उपस्थित रहे I
समान नागरिक संहिता पर की गई चर्चा
बैठक में उत्तराखण्ड राज्य अन्तर्गत लागू समान नागरिक संहिता पर चर्चा की गई I राज्य सरकार द्वारा जनजातियों के विशिष्ट संस्कृति एवं रीति-रिवाज को देखते हुए उन्हें समान नागरिक संहिता से बाहर रखा गया है, जो प्रशंसनीय कदम है I राज्य के पांचो जनजातियों की शीर्ष समिति ने मुख्यमंत्री का यह ऐतिहासिक कदम उठाने के लिए बधाई देते हुए आभार व्यक्त किया गया।
बैठक में समिति के नपलच्याल ने कहा कि जनजाति समुदाय को इस बात की खुशी है कि सरकार ने राज्य के जनजाति समुदाय को संरक्षण देते हुए यूसीसी से बाहर रखा है, लेकिन चिंतनीय है कि लिव- इन रिलेशन के ऐसे जोड़े जिनमें से एक जनजाति का /की हो, उन्हें इस संहिता के अन्तर्गत पंजीकरण से छूट दी गई है I ऐसा प्रविधान जनजाति महिला की सुरक्षा एवं कल्याण के विरूद्ध है और ऐसे महिलाओं के शोषण की प्रबल संभावना है, क्योंकि पंजीकरण न करने की स्थिति में अवांछनीय तत्व, धोखे से गुमराह कर जनजाति की महिलाओं को लिव-इन संबंधों में फँसायेगे और ऐसे मामलों में महिलाओं को मिलने वाले संवैधानिक/विधिक सुरक्षा से लाभान्वित होने के अवसर से वंचित हो जायेंगे I समिति ने प्रस्ताव पारित कर सरकार से अनुरोध किया है कि लिव -इन रिलेशनशिप में जहाँ एक पक्ष जनजाति का हो और दूसरा पक्ष गैर जनजाति का हो, ऐसे मामलों में भी पंजीकरण अनिवार्य कर दिया जाय ।
समिति ने प्रथम जौनसारी फिल्म ‘‘मैरै गांव की बाट” के लिए केएस चौहान व टीम का जताया आभार
समिति ने प्रथम जौनसारी फिल्म ‘‘मैरै गांव की बाट” बनाये जाने एवं उसकी अपार सफलता के लिए के.एस. चौहान तथा उनकी टीम का आभार व्यक्त किया गया। पूर्व मुख्य सचिव एन.एस. नपलच्याल ने कहा कि यह जनजाति समुदाय की संस्कृति एवं सभ्यता पर आधारित उत्कृष्ट फिल्म है। इससे प्रेरणा लेकर अन्य जनजातीय समुदाय को भी फिल्म बनाये जाने पर विचार करना चाहिए।

