राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट के सवाल के जवाब में मिली जानकारी – रानीखेत ताड़ीखेत स्थित आयुर्वेद संस्थान, अनुसंधान के क्षेत्र में निभा रहा अहम भूमिका
देश भर में आयुर्वेद के 6302 पीएचसी और 3191 सीएचसी से हो रहा उपचार
देहरादून । देश भर में आयुर्वेद पद्धति से संचालित 6302 पीएचसी, 3191 सीएचसी और 475 डीएच के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है
। केंद्र सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी में सामने आया है कि रानीखेत के ताड़ीखेत स्थित आयुर्वेद संस्थान, अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने सदन के पटल पर आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध एवं होम्योपैथी चिकित्सा और शिक्षा को लेकर सवाल उठाया था। जिसके जवाब में आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्री प्रतापराव जाधव
ने बताया कि भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के माध्यम से विभिन्न उपाय किए हैं। राष्ट्रीय आयुष मिशन की केंद्रीय प्रायोजित योजना के तहत, उन राज्यों, संघ राज्य क्षेत्र की सरकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान है जहां सरकारी क्षेत्र में आयुष शिक्षण संस्थानों की उपलब्धता अपर्याप्त है। तदनुसार, राज्य, संघ राज्य क्षेत्र एनएएम दिशानिर्देशों के प्रावधानों के अंतर्गत राज्य वार्षिक कार्य योजनाओं के माध्यम से उपयुक्त प्रस्ताव प्रस्तुत करके वित्तीय सहायता प्राप्त कर रहे हैं। केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद जो एक स्वायत्त संगठन है, द्वारा उत्तराखंड में अपनी परिधीय इकाई, क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, रानीखेत (तारीखेत) के माध्यम से एक महत्वपूर्ण अनुसंधान केंद्र संचालित किया जा रहा है।
साथ ही बताया कि भारत सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, और जिला अस्पतालों में आयुष सुविधाओं के सह-स्थापन की कार्यनीति अपनाई है, इस प्रकार रोगियों को एक ही स्थान पर विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों हेतु विकल्प चुनने में सक्षम बनाया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयुष डॉक्टरों, पैरामेडिक्स की नियुक्ति और उनके प्रशिक्षण का समर्थन किया जा रहा है, जबकि आयुष मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुष अवसंरचना, उपकरण, फर्नीचर और दवाओं के लिए सहायता साझा जिम्मेदारियों के रूप में प्रदान की जा रही है। 31 दिसंबर 2025 तक देश भर में 6302 पीएचसी, 3191 सीएचसी और 475 डीएच को सह-स्थापित किया गया है। इसके अलावा, आयुष मंत्रालय ने संस्थागत तंत्र, नैदानिक प्रथाओं के मानकीकरण, क्षमता निर्माण, अनुसंधान सहयोग और सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल के माध्यम से मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा के साथ आयुष पद्धतियों के साक्ष्य-आधारित एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाया है।

