उत्तराखंड के पूर्ण साक्षर राज्य स्टेटस को हरी झंडी ,राज्यपाल ने दी मंजूरी, यह उपलब्धि हासिल करने वाला देश का छठा राज्य बना उत्तराखंड
देहरादून।उत्तराखण्ड पूर्णत: साक्षर राज्य बन गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 तथा उल्लास (ULLAS- Understanding of Lifelong Learning for All in Society) नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के मानकों को पूरा करने के दृष्टिगत राज्यपाल गुरमीत सिंह ने उत्तराखंड राज्य को पूर्णत: साक्षर राज्य घोषित करने की स्वीकृति दी है।
उत्तराखंड इस उपलब्धि को हासिल करने वाला देश का छठा राज्य बन गया है। उत्तराखंड से पहले इस सूची में मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम का स्थान है।
उल्लेखनीय है कि बीती 25 मई को माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। यह प्रस्ताव केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को संशोधित मानकों के अनुरूप तैयार किया गया था। प्रस्ताव में यह स्पष्ट तौर पर बताया गया था कि यह संभव नहीं है कि कोई राज्य या देश 100 फीसदी साक्षरता हासिल करे क्योंकि यह व्यावहारिक रूप से मुमकिन नहीं है।ऐसा इसलिए, क्योंकि बढ़ती उम्र, गंभीर बीमारियां और मानसिक एवं बौद्धिक अक्षमताएं इसमें बाधा बनती हैं। इस कुछ कारणों से कुछ प्रतिशत लोग साक्षरता अभियानों का हिस्सा नहीं बन पाते।इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार द्वारा 95 फीसदी साक्षरता दर को पूर्ण साक्षरता मान लिया गया है।
प्रस्ताव में यही कारण देते हुए राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने की मांग की गई थी।
वहीं, उल्लास कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025 के लिए किए गए आकलन के अनुसार,सात वर्ष से कम आयु के बच्चों को छोड़कर उत्तराखंड की अनुमानित जनसंख्या 01 करोड़ 23 लाख चार हजार 601 आंकी गई है।
इनमें केवल एक लाख 31 हजार 986 लोग ऐसे हैं जो अभी भी निरक्षर श्रेणी में आते हैं।यह संख्या राज्य की कुल पात्र आबादी का मात्र 1.3 प्रतिशत है।इसका अर्थ है कि राज्य के 98 प्रतिशत से अधिक लोग पढ़ने-लिखने की क्षमता रखते हैं।यही आंकड़े उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किए जाने का प्रमुख आधार बने हैं।
साल 2023-24 में उत्तराखंड की साक्षरता दर थी 83.8 प्रतिशत
साल 2023-24 में उत्तराखंड की साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत थी। साल 2025 में यह बढ़कर 98.7 प्रतिशत तक पहुंची। इसके बाद उत्तराखंड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है। जिन्होंने कम समय में साक्षरता के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है।
प्रदेश को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया जाना राज्य के लिए मील का पत्थर : सीएम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया जाना राज्य के लिए मील का पत्थर है। इस उपलब्धि के लिए सरकार के द्वारा किये गये सतत प्रयासों के साथ ही प्रदेशवासियों की सक्रिय भागीदारी की भी अहम भूमिका है।इस प्रकार के सामूहिक प्रयासों से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में बल मिलेगा साथ ही डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, सतत शिक्षा तथा जीवनोपयोगी कौशलों को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी। इस उपलब्धि पर मैं सभी प्रदेशवासियों को अपनी और सरकार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं।
देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बनना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व का विषय : डॉ रावत
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बनना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व का विषय है। हमारी सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण एवं आजीवन शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।यह सफलता विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।
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उत्तराखंड का पूर्ण साक्षर राज्य घोषित होना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व और हर्ष का विषय है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा उल्लासनव भारत साक्षरता कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है। साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने व सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक चेतना, आत्मनिर्भरता और समग्र विकास का आधार है। उत्तराखंड ने इस उपलब्धि के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए प्रदेश के सभी शिक्षकों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, स्वयंसेवकों तथा प्रत्येक नागरिक को बधाई व शुभकामनाएं।

