उत्तराखंडदेहरादून

पेपर लीक मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ पर छेड़ा राष्ट्रव्यापी अभियान -28 शहरों में 40 दिन तक चलेगी ‘छात्रों की गूंज’

पेपर लीक से बर्बाद हो रहा देश के युवाओं का भविष्य, कांग्रेस
‘नेशनल ट्रॉमा एजेंसी’ बना एनटीएः रंजीत रंजन
कहा -89 से अधिक पेपर लीक, सरकार मौन
देहरादून। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर छात्रों और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रव्यापी ‘छात्रों की गूंज’ अभियान का शुभारंभ किया है। देश के 28 शहरों में 40 दिनों तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से छात्रों, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों, कॉलेज परिसरों, पुस्तकालयों और युवा समूहों तक पहुंच बनाई जाएगी।
राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन और कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने गुरूवार को देहरादून के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज देश का युवा पेपर लीक, भर्ती घोटालों, परीक्षा रद्द होने और परिणामों में देरी से त्रस्त है, लेकिन सरकार उसकी आवाज सुनने को तैयार नहीं है।
रंजीत रंजन ने कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं, मगर भाजपा सरकार की नाकाम नीतियों और भ्रष्ट परीक्षा व्यवस्था के कारण उनका भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पारदर्शिता के नाम पर बनाई गई राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) आज छात्रों के लिए ‘नेशनल ट्रॉमा एजेंसी’ बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में 89 से अधिक पेपर लीक और परीक्षा घोटाले सामने आए, लेकिन सरकार आज तक किसी बड़े मास्टरमाइंड, राजनीतिक संरक्षण देने वाले व्यक्ति या पूरे नेटवर्क का खुलासा नहीं कर सकी। कार्रवाई केवल छोटे दलालों और बिचौलियों तक सीमित रही, जबकि असली दोषी बचते रहे।
प्रीतम सिंह ने कहा कि सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि पूरे मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चुप्पी साध रखी है। प्रेस वार्ता में सुमित्तर भुल्लर, ज्योति रौतेला, वैभव वालिया, गरिमा मेहरा दसौनी, नजमा खान, अभिनव थापर, विशाल सिंह भोजक, विकास नेगी, सुलेमान अंसारी, नानक चंद, डॉ. जसविंदर गोगी, संजय पालीवाल, गोदावरी थापली व इशिता आदि मौजूद रहे।
कांग्रेस ने इन मांगों को उठाया 

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफा दें व पेपर लीक माफिया, एजेंसियों, अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के संभावित संबंधों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) समेत पूरी परीक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच कर उसे पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए। परीक्षा, परिणाम और नियुक्तियों के लिए तय वार्षिक कैलेंडर लागू किया जाए तथा उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

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