उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र – नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा- 33 प्रतिशत आरक्षण फौरन लागू करे सरकार
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से पूछा सवाल, कहा – कानून लागू करने में इतनी देरी क्यों,
कहा – बिल पास होता तो संसद में राज्य की हिस्सेदारी 0.93 से घटकर 0.72 प्रतिशत रह जाती
देहरादून। महिला आरक्षण कानून 2023 को लेकर उत्तराखंड की सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए साफ कहा कि महिलाओं के अधिकारों पर सरकार पूरी तरह फेल साबित हुई है। उन्होंने मांग उठाई कि 2027 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों में मौजूदा सीटों पर ही 33 फीसदी महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाए।
आर्य ने तीखे अंदाज में कहा कि अगर इसके लिए केंद्र को दोबारा संविधान संशोधन लाना पड़े तो विशेष सत्र बुलाया जाएए लेकिन सरकार जानबूझकर इस ऐतिहासिक कानून को लटकाए बैठी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नीयत महिलाओं को अधिकार देने की नहीं, बल्कि उन्हें इंतजार करवाने की है।
मंगलवार को उत्तराखण्ड विधानसभा के विशेष सत्र से पहले सदन की सीढ़ियों पर धरना देते हुए और बाद में सदन के अंदर कांग्रेस मुखर दिखी। महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा गेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। सभी विधायकों ने एक सुर में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय की मांग उठाई। अंकिता भंडारी केस का जिक्र करते हुए आर्य ने कहा कि आज तक वीआईपी आरोपी का खुलासा न होना सरकार की मिलीभगत को दर्शाता है। आर्य ने बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि महिला आरक्षण कानून की अधिसूचना तीन साल तक क्यों रोकी गई और आखिर 16 अप्रैल 2026 को ही क्यों जारी की गई, उन्होंने मुख्यमंत्री से जवाब मांगा कि इस देरी के पीछे कौन सा दबाव काम कर रहा था।
इसके साथ ही उन्होंने संसद में प्रस्तावित विधेयकों पर भी हमला बोला। आर्य ने कहा कि अगर लोकसभा सीटें 50 फीसदी बढ़ाने वाला प्रस्ताव पास हो जाता तो उत्तराखंड की हिस्सेदारी 0ः93 प्रतिशत से घटकर 0ः72 प्रतिशत रह जाती। उन्होंने भाजपा सांसदों की चुप्पी पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि क्या वे राज्य के हितों की रक्षा करने में नाकाम नहीं रहे।
कांग्रेस का 33 फीसदी आरक्षण लागू करने का संकल्प विस में खारिज
देहरादून। उत्तराखण्ड विधानसभा के विशेष सत्र में मंगलवार को कांग्रेस की ओर से 33 फीसदी आरक्षण लागू करने का संकल्प लाया गया, मगर स्पीकर की और से इसे खारिज किए जाने पर आर्य ने इसे लोकतंत्र और महिलाओं के अधिकारों के साथ खुला अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से भी भाग रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कदमों से न केवल संसद बल्कि विधानसभा में भी पहाड़ी क्षेत्रों की आवाज कमजोर हो जाएगी। यह पहाड़ के हक को दबाने की साजिश है।
महिलाओं की सुरक्षा पर भी सरकार को घेरते हुए आर्य ने कहा कि प्रदेश में महिलाएं कहीं सुरक्षित नहीं हैं, घर, सड़क या जंगल हर जगह खतरा है। चमोली, हरिद्वार और चंपावत की घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। जंगली जानवरों के हमलों में महिलाओं की लगातार हो रही मौतों पर भी उन्होंने सरकार को घेरा और कहा कि ठोस कार्रवाई के बजाय केवल बयानबाजी हो रही है। अंत में आर्य ने साफ चेतावनी दी, अगर जल्द महिला आरक्षण लागू नहीं हुआ और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो कांग्रेस सड़क से सदन तक बड़ा आंदोलन छेड़ेगी।
देहरादून। महिला आरक्षण कानून 2023 को लेकर उत्तराखंड की सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए साफ कहा कि महिलाओं के अधिकारों पर सरकार पूरी तरह फेल साबित हुई है। उन्होंने मांग उठाई कि 2027 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों में मौजूदा सीटों पर ही 33 फीसदी महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाए।
आर्य ने तीखे अंदाज में कहा कि अगर इसके लिए केंद्र को दोबारा संविधान संशोधन लाना पड़े तो विशेष सत्र बुलाया जाएए लेकिन सरकार जानबूझकर इस ऐतिहासिक कानून को लटकाए बैठी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नीयत महिलाओं को अधिकार देने की नहीं, बल्कि उन्हें इंतजार करवाने की है।
मंगलवार को उत्तराखण्ड विधानसभा के विशेष सत्र से पहले सदन की सीढ़ियों पर धरना देते हुए और बाद में सदन के अंदर कांग्रेस मुखर दिखी। महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा गेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। सभी विधायकों ने एक सुर में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय की मांग उठाई। अंकिता भंडारी केस का जिक्र करते हुए आर्य ने कहा कि आज तक वीआईपी आरोपी का खुलासा न होना सरकार की मिलीभगत को दर्शाता है। आर्य ने बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि महिला आरक्षण कानून की अधिसूचना तीन साल तक क्यों रोकी गई और आखिर 16 अप्रैल 2026 को ही क्यों जारी की गई, उन्होंने मुख्यमंत्री से जवाब मांगा कि इस देरी के पीछे कौन सा दबाव काम कर रहा था।
इसके साथ ही उन्होंने संसद में प्रस्तावित विधेयकों पर भी हमला बोला। आर्य ने कहा कि अगर लोकसभा सीटें 50 फीसदी बढ़ाने वाला प्रस्ताव पास हो जाता तो उत्तराखंड की हिस्सेदारी 0ः93 प्रतिशत से घटकर 0ः72 प्रतिशत रह जाती। उन्होंने भाजपा सांसदों की चुप्पी पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि क्या वे राज्य के हितों की रक्षा करने में नाकाम नहीं रहे।
कांग्रेस का 33 फीसदी आरक्षण लागू करने का संकल्प विस में खारिज
देहरादून। उत्तराखण्ड विधानसभा के विशेष सत्र में मंगलवार को कांग्रेस की ओर से 33 फीसदी आरक्षण लागू करने का संकल्प लाया गया, मगर स्पीकर की और से इसे खारिज किए जाने पर आर्य ने इसे लोकतंत्र और महिलाओं के अधिकारों के साथ खुला अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से भी भाग रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कदमों से न केवल संसद बल्कि विधानसभा में भी पहाड़ी क्षेत्रों की आवाज कमजोर हो जाएगी। यह पहाड़ के हक को दबाने की साजिश है।
महिलाओं की सुरक्षा पर भी सरकार को घेरते हुए आर्य ने कहा कि प्रदेश में महिलाएं कहीं सुरक्षित नहीं हैं, घर, सड़क या जंगल हर जगह खतरा है। चमोली, हरिद्वार और चंपावत की घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। जंगली जानवरों के हमलों में महिलाओं की लगातार हो रही मौतों पर भी उन्होंने सरकार को घेरा और कहा कि ठोस कार्रवाई के बजाय केवल बयानबाजी हो रही है। अंत में आर्य ने साफ चेतावनी दी, अगर जल्द महिला आरक्षण लागू नहीं हुआ और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो कांग्रेस सड़क से सदन तक बड़ा आंदोलन छेड़ेगी।

